आंजनेय विश्वविद्यालय में “प्रभु श्रीराम और लोक संस्कृति” पर विशेष व्याख्यान

रायपुर

अब देश में दो बार दिवाली मनेगी. एक कार्तिक महीने में और दूसरा 22 जनवरी को. ये बातें डॉ. कमलेश गोगिया ने आंजनेय यूनिवर्सिटी में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में कही. आंजनेय विश्वविद्यालय में बुधवार को “प्रभु श्रीराम और लोक संस्कृति” विषय पर चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिक्षाविद् एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. कमलेश गोगिया शामिल हुए. इस अवसर पर डॉ. कमलेश गोगिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ के कण कण में राम बसे हैं. यहाँ दिन की शुरुआत ही राम-राम से शुरू होती है. यहाँ की संस्कृति, सभ्यता और लोक परंपरा प्रभु श्रीराम के आदर्शों को चरितार्थ करते हैं. उन्होंने कहा कि आज हम जिस जगह में बैठ कर राम पर बात कर रहें हैं. यह जगह राम का ननिहाल भी है. हर माँ चाहती है उसका पुत्र प्रभु राम के आदर्शों को आत्मसात करे.

इस अवसर पर कुलपति डॉ. टी. रामाराव ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय के लिए सौभाग्य की बात है कि आज हम राम पर बात कर रहें हैं. राम जैसा आचरण और आदर्श अपनाने की आवश्यकता है.

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभु श्रीराम के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर हुआ. जिसके बाद  विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. टी. रामाराव ने पुष्पगुच्छ देकर मुख्य वक्ता डॉ. कमलेश गोगिया का स्वागत किया. कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन और विषय परिचय पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष राहुल तिवारी ने दिया. आभार प्रदर्शन फिल्म विभाग के विभागाध्यक्ष अंकित शुक्ला ने किया. कार्यक्रम का संचालन विनोद सावंत ने किया. इस अवसर पर कला और मानविकी संकाय अध्यक्ष डॉ. रुपाली चौधरी, डॉ. निधि शुक्ला, डॉ. शिल्पा शर्मा, डॉ. प्रांजली गनी समेत समस्त संकाय के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित थे.

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