संविधान-दिवस’’ के अवसर पर न्यायिक अधिकारियों द्वारा व्यापक स्तर में जागरूकता शिविर का आयोजन

दुर्ग

छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशन पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के तत्वाधान में एवं जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग नीता यादव के मार्गदर्शन में आज “विधि दिवस’’ के अवसर पर जिला न्यायालय स्थापना दुर्ग के माननीय न्यायाधीशगण द्वारा दुर्ग में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

संविधान-दिवस-के-अवसर-पर उक्त आयोजित शिविर में उपस्थितजनों एवं विद्यार्थियों को माननीय न्यायधीशगणों द्वारा ’’भारत के संविधान की उद्देशिका’’ के वाचन से कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए बताया गया कि भारतीय लोकतंत्र में आज का दिन (26 नवंबर) काफी महत्वपूर्ण है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की आत्मा हमारा ’’संविधान’’ जिसे हमने आज ही के दिन 26 नवंबर 1949 को स्वीकार किया था और जिसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। यह एक ऐतिहासिक पल है। इसी दिन एक राष्ट्र के तौर पर हमने तय किया था कि अब आगे हमारी दिशा किन ’’निर्देशों’’ पर होगी किन ’’नियमों’’ पर होगी ’’सविधान’’ उक्त निर्देश एवं नियम के एक-एक शब्द पवित्र व पूजनीय हैं।

हमारा संविधान जितना जीवंत है उतना संवेदनशील तथा जितना जवाबदेह है उतना सक्षम भी है।  ’’संविधान’’ ही है जो देश को लोकतंत्र के रास्ते पर बनाए रखता है और उसे भटकने से रोकता है अर्थात भारत का संविधान विधि के नियमों को स्थापित करने के साथ-साथ लोकतंत्र का ’’रक्षक’’ भी है और मानवाधिकारों की रक्षा करता है। माननीय न्यायाधीशगणों द्वारा उक्त आयोजित जागरूकता शिविरों में आगे यह भी बताया गया  कि- देश में ’’विधि दिवस’’ के आयोजन की परंपरा 1979 से प्रारंभ हुई तथा ’’भारत का संविधान’’ विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है जिसमें सभी वर्गो, धर्मो, विचारों, भाषाओं, क्षेत्रों को समान स्थान प्रदान किया गया है। इसमें आवश्यकता मांग के अनुसार समय-समय पर संशोधन कर इसे और अधिक प्रभावशाली प्रासंगिक बनाया गया है।शिविर में उपस्थित विद्यार्थियों को संविधान में प्रदत्त नागरिकों के मूल कर्तव्य, मूल अधिकारों के बारे में बताते हुए इन्हें एक नागरिक के रूप में उनकी जिम्मेदारियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गयी।

26 नवंबर ’’संविधान-दिवस’’ के अवसर पर माननीय न्यायाधीशगणों द्वारा विभिन्न स्थानों पर आयोजित उक्त जागरूकता शिविरों में लगभग 840 विद्यार्थी/आमजन लाभांवित हुए है। वहीं उक्त अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग क्षेत्रांतर्गत स्थापित कार्यालय लीगल एड डिफेंस कौसिंल द्वारा केन्द्रीय जेल दुर्ग में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में जेल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा जेल में निरूद्ध सजायाप्ता व विचाराधीन बंदियों को ’’भारत के संविधान की उद्देशिका’’ का वाचन करते हुए बंदियों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी गयी। विधि दिवस पर जेल में आयोजित इस जागरूकता शिविर में लगभग 85 बंदी लाभांवित हुए है।

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