नगरीय निकाय एवं पंचायती राज महासम्मेलन

कांकेर

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रियंका गांधी ने बस्तर संभाग के कांकेर प्रवास के दौरान वहां आयोजित नगरीय निकाय एवं पंचायती राज महासम्मेलन परिसर में लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया। अवलोकन के दौरान गांधी ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाई जा रही नवाचारी योजनाओं की विशेष रूप से सराहना की और इसे आदिवासी-वनवासियों सहित आम जनता के हित के लिए अनुकरणीय बताया। इस दौरान उनके द्वारा विभिन्न विभागों की हितग्राहीमूलक योजनाओं के तहत कुल 12 हजार 730 हितग्राहियों को 5 करोड़ 78 लाख 31 हजार रूपए की सामग्री, ऋण स्वीकृति पत्रक, चेक, अनुदान, वन अधिकार मान्यता पत्र आदि का वितरण भी किया गया।

वनांचल के लघु वनोपज उत्पादों और स्थानीय कारीगरों की उत्कृष्ट कलाकृति की सराहना

बघेल और गांधी ने नगरीय निकाय एवं पंचायती राज महासम्मेलन परिसर में अवलोकन के दौरान एलडब्ल्यूई से प्रभावित क्षेत्र के कनेक्टिविटी क्रांति के मॉडल की बखूबी सराहना की। इसके तहत विगत 5 वर्षों में यहां दूरस्थ वनवासी अंचल में 4 हजार 599 किलोमीटर लम्बी एक हजार 460 सड़कों का निर्माण हुआ है, जो बस्तर कोंडागांव, कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर को आपस में जोड़ती है।

लगभग 13 हजार हितग्राहियों को 06 करोड़ रूपए की सामग्री तथा राशि का वितरण

इसी तरह अतिथियों ने बस्तर संभाग के परंपरागत कला स्टॉल का भी अवलोकन किया। यहां हथकरघा बुनाई प्रशिक्षण केंद्र में पिछले तीन वर्षों में 105 महिला समूह को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा गया है। इस बीच श्रीमती गांधी ने चरखा चलाकर सूत भी काता और माटी कला के स्टॉल में दीया में कलात्मक रंगाई भी की। उन्होंने उत्तर बस्तर की प्रसिद्ध कला बेल मेटल से तैयार उत्पादों का अवलोकन किया। यहां महिला समूह को बेल मेटल के माध्यम से स्व-रोजगार से जोड़ा गया है।

स्टॉल में अवलोकन के दौरान स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल की छात्राओं ने गांधी का स्वागत बांस से बनी माला पहनाकर किया। कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाली छात्राओं ने गांधी के साथ फोटो भी खिंचाई। गांधी ने छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें ऑल द बेस्ट एवं वी आर प्राउड ऑफ़ यू भी कहा। सरकार की विशेष योजना के तहत जिले में थर्ड जेंडर के 8 लोगों को आरक्षक की नौकरी भी दी गई है। गांधी ने थर्ड जेंडर आरक्षक रतनू, दिव्या निषाद और सूरज कुमार से चर्चा की और सरकार की इस योजना की सराहना की।

गांधी ने स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल का अवलोकन किया। हब एंड स्पोक मॉडल हमर लैब का अवलोकन करते हुए यहां लैब में संचालित गतिविधियों की जानकारी ली।  गांधी ने उन्होंने मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की सराहना की। इस अभियान को आठ चरणों में चलाया गया, जिससे धनात्मक प्रकरणों, मृत्यु दर और एपीआई दर में बड़ी कमी आई है।

इस बीच हितग्राही प्यारी टांडिया ने बताया कि उन्हें गौपालन से 3 लाख रुपए की आय प्राप्त हुई है। उल्लेखनीय है कि यहां 14 गौठानों में रीपा का संचालन किया जा रहा है, जिसमें 39 गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, समूह द्वारा अब तक 51 लाख रुपए के उत्पाद का विक्रय किया गया है। आय मूलक गतिविधियों से 430 लोगो को रोजगार मिला है और गोबर विक्रेताओं को अब तक 7.22 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
गांधी एवं मुख्यमंत्री बघेल ने स्टॉल अवलोकन के दौरान स्थानीय उत्पादों और यहां के कारीगरों की उत्कृष्ट कलाकृति को देखते हुए उसकी सराहना भी की। उन्होंने छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड के नाम से वनों से संग्रहित कर आदिवासी महिलाओं द्वारा निर्मित 133 प्रकार के हर्बल उत्पाद और 21 प्रकार के मिलेट्स उत्पादों का अवलोकन किया। इस अवसर पर अतिथियों को हस्त निर्मित सामग्री उपहार स्वरूप भेंट किया गया। वनोपज प्रसंस्करण इकाई से रोजगार एवं आय में वृद्धि, मिलेट्स महतारी कैफे, कोदो कुटकी एवं रागी प्रसंस्करण, मक्का प्रसंस्करण केंद्र का अवलोकन कर श्रीमती गांधी ने हितग्राहियों से बातचीत की और उत्पादों की प्रशंसा की।

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