जांजगीर-चांपा जिला गोमूत्र खरीदी में पूरे प्रदेश में अव्वल

रायपुर

राज्य में गोमूत्र की खरीदी में जांजगीर-चांपा जिला प्रथम स्थान पर है। जांजगीर-चांपा जिले में  अब तक 5093 लीटर गोमूत्र की खरीदी हो चुकी है, जबकि 2926 लीटर की गोमूत्र खरीदी के साथ कबीरधाम जिला दूसरे स्थान पर है। कोरिया जिला गौमूत्र खरीदी में तीसरे स्थान पर है, यहां 2993 लीटर गोमूत्र खरीदी हुई है।

गोमूत्र से बना ब्रम्हास्त्र और जीवामृत पेस्टीसाईड का बेहतर विकल्प

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने, कृषि की लागत को कम करने और रासायनिक कीटनाशकों का खेती किसानी में कम से कम उपयोग करने के लिए लगातार सार्थक पहल की जा  रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर 28 जुलाई, हरेली पर्व से पूरे प्रदेश में गोमूत्र की खरीदी 4 रुपए प्रति लीटर की दर से की जा रही है। हरेली पर्व से शुरू हुए गोमूत्र खरीदी कार्य में जांजगीर-चांपा जिला अब तक 5093 लीटर की खरीदी के साथ पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर है।

ब्रम्हास्त्र व जीवामृत विक्रय से समूह की महिलाओं को 82,500 रूपए की आय

कलेक्टर श्री तारन प्रकाश सिन्हा के मार्गदर्शन में जांजगीर-चांपा जिले में स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा गोमूत्र से जीवामृत और ब्रम्हास्त्र कीटनाशक तैयार एवं विक्रय अतिरिक्त आय अर्जित की जा रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और बेहतर हो रही है। स्व-सहायता समूहों ने गोमूत्र से बने जीवामृत और ब्रम्हास्त्र  बेचकर लगभग 82 हजार 500 रुपए का लाभ अर्जित किया है। रासायनिक कीटनाशक के जगह गोमूत्र से बनने वाले उत्पाद जीवामृत और ब्रम्हास्त्र खेती-किसानी के लिए ज्यादा फायदेमंद है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता रासायनिक कीटनाशक से कई गुना अधिक है।

4 रुपए प्रति लीटर की दर से 5093 लीटर गोमूत्र की खरीदी

जांजगीर-चाम्पा जिले के दो गोठान विकासखंड अकलतरा के तिलाई एवं विकासखंड नवागढ़ के खोखरा गोठान में गोमूत्र खरीदी की जा रही है। तिलई गोठान में स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा गोमूत्र से 200 लीटर जीवामृत और 721 लीटर ब्रह्मास्त्र बनाकर 646 लीटर उत्पाद बेचकर कुल 30 हजार 300 रुपए का लाभ प्राप्त कर चुकी है। इसी प्रकार खोखरा गोठान में सागर स्व-सहायता समूह की महिलाएं गोमूत्र से अब तक 724 लीटर ब्रह्मास्त्र और 400 लीटर जीवामृत के उत्पाद बेचकर 52 हजार 200 रुपए का लाभ प्राप्त कर चुकी हैं। समूह की महिलाओं ने बताया कि गोठान के माध्यम से अब तक केवल गोबर खरीदी कर और उससे बने उत्पाद बेचे जा रहे थे लेकिन अब गोमूत्र से भी उत्पाद तैयार कर विक्रय करने से आय में बढ़ोत्तरी हुई है।
उप संचालक कृषि विभाग ने बताया कि ब्रह्मास्त्र का निर्माण नीम, धतूरा, बेसरम, आंक, सीताफल और गोमूत्र के मिश्रण से बनाया जाता है तथा इसका उपयोग फसलों में कीटनाशक के रूप में किया जाता है, जबकि जीवामृत के छिड़काव से पौधे में वृद्धि तथा उत्पादकता बढ़ती है। गोमूत्र से बने ब्रम्हास्त्र कीटनाशक बाजार में मिलने वाले पेस्टिसाइड का बेहतर और सस्ता प्राकृतिक विकल्प है और इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता रासायनिक कीटनाशक से कई गुना अधिक है। वर्तमान में जीवामृत 40 रुपए प्रति लीटर की दर से और ब्रम्हास्त्र 50 रुपए प्रति लीटर की दर से विक्रय किया जा रहा है।

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