समुह की दीदीयाँ को दिया जाएगा प्रशिक्षण

दुर्ग

गौवंश आधारित कृषि अर्थव्यवस्था, कृषि स्वावलंबन, गौशाला व्यवस्था पंचगव्य, आयुर्वेद औषधि निर्माण स्व-सहायता समुह की दीदीयों प्राप्त करेंगे प्रशिक्षण। गोधन विकास योजना के तहत जिला दुर्ग का एक नया कदम, गोबर से बने सामग्री जिसमें गोबर के गमले, गोबर के दीये, गोबर से निर्मित वर्मी खाद बनायी जा रही है, जिससे स्व सहायता समूहों को आजीविका के साधन बने हुए है ।  वहीं जिला दुर्ग में गोबर से बने पेंट की आधारशिला रखी गयी है ।

अब इस दिशा में नया कदम उठाते हुए स्व सहायता समूहों द्वारा गोबर से अत्याधुनिक सामग्री बनाने का प्रषिक्षण प्राप्त करने हेतु, जिसमें 12 स्व सहायता समूहों की दीदीयों को विज्ञान अनुसंधान केन्द्र देवलापार, नागपुर में प्रशिक्षण गौवंश आधारित कृषि अर्थव्यवस्था, कृषि स्वावलंबन, गौशाला व्यवस्था पंचगव्य, आयुर्वेद औषधि निर्माण हेतु प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

जिसमें प्रभारी अधिकारी संजय मस्के( सहायक विकास विस्तार अधिकारी) द्वारा बताया गया कि गोबर से बनी उत्पादों का अच्छा व्यापार दुर्ग जिला में संभव है । मांग के आधार पर समूहों द्वारा वर्मी दीये, गमले, पेंट का निर्माण किया जा रहा है । साथ ही महिलाओं के दीदी द्वारा उत्पादन की गुणवत्ता के साथ-साथ मांग में भी गति आयी है । गांव के विकास के साथ-साथ दीदीयों की आजीविका के साधन बने हुए है । साथ ही महिलाओं में गोधन विकास योजना में उत्साह देखा गया है ।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत आजीविका गतिविधि संचालन हेतु पंचगव्य प्रशिक्षण दिनांक 27.09.2022 से 02.10.2022 तक नागपुर (महाराष्ट्र) में प्रस्तावित है जिसमें शामिल होने वाले प्रतिभागीय प्रभा साहू(पी.आर.पी.) जनपद पंचायत दुर्ग,  अभिषेक बघेल(इंडस्ट्रियल फेस्लेटर) दुर्ग, वेणुमति साहू, कातरो, हेमलता सार्वे, सिरसाखुर्द, तारामति यादव, उमरपोटी, कला किरण, उमरपोटी, सुरेखा बघेल, उमरपोटी, उमा रॉय, उमरपोटी, भुनेश्वरी देवांगन, बोड़ेगांव, उषा देवांगन बोड़ेगांव, महेश्वरी सिन्हा, गंगोत्री सिन्हा, शशि जैन एवं वीणा ठाकुर दीदीयों को प्रषिक्षण हेतु रवाना किया गया है । जिसमें दल को अरदीप ढी़ढी सहायक परियोजना अधिकारी मनरेगा ने उपयोगी सामग्री की व्यवस्था कर रवाना किया ।

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